कविता : रक्षाबन्धन

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हर साल सावनमें अबईअ 

भाइसे मिलन ई बन्धन राखी

भाइके हातमें चमकईअ 

आकाशके तारा जेइसन राखी।।१।।


            सारे दुनिया से मूल्यमान

           चिजसे बढकर हए राखी

           सब दिन भाइके रक्षा करईअ 

          जेकरा बहीन बांन्हत राखी।।२।।


राखी आएल खुसिया लाएल।

भैयाके हातसे आशीर्वाद पाईल। 

राखी ,टीका द्वीप आ मिठाई

ई सबसे थाली खुब सजाई।।३।।


                 भाई- बहीन के प्यार से 

                 केकरो  नजर न  लागे ।

                भाई -बहीनमे भेद न 

             अईसन चेतना जगमे जागे।।४।


सुबह भाई -बहिन करत स्नान 

भाइके माथापर लगाएत टीका।

बहिन मागे प्यार आ दुलार

नचाही बरका -बरका उपहार।।५।।


लेखक :   राम विश्वास कुशवाहा

ठेगाना :हरिवन -३,सर्लाही

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